Wednesday, 3 October 2012

"मैं
रास्ता जानता हूँ,जो बहुत ही सीधा लेकिन संकरा है.बिलकुल तलवार की धार की
तरह.मैं उस पर चलकर ख़ुशी महसूस करता हूँ.मैं रोता हूँ जब फिसल जाता
हूँ.भगवान कहते हैं-जो संघर्ष नही करता वो बर्बाद हो जाता है.मुझे इस बात
पर पूरा विश्वास है.हालाँकि मैं अपनी कमजोरी के कारन हजार बार फिसलूँगा
लेकिन मेरा विश्वास नही टूटेगा.मुझे विश्वास है कि एक दिन उजाला जरुर
दिखेगा जब चमक जीत कर आयेगी.एक दिन जरुर..........."[महात्मा गाँधी]

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